Saturday, August 9, 2014

क़ब्रें बात किया करती हैं


क़ब्रें बात किया करती हैं,
दबी, सनी, गीली मिट्टी के 
सूखने से पहले ,
और दुआ पढ़कर लौट जाने वाले 
आखिरी शख़्स के जाने के बाद 
कभी सहमी, कभी दबी आवाज़ में ,
कभी चीख़ते हुए यूँ ही कई दफ़ा ,
कब्रें बात किया करती हैं 

1 comment:

राजेंद्र कुमार said...

बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति, रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें।